कलयुग में भगवान की भक्ति सबसे आसान

आनन्द पाण्डेय/इटावा- महेवा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पँचायत आनेपुर में झाड़ी वाले मन्दिर पर चल रही सात दिवसीय राम कथा के चौथे दिन सरस कथावाचक पंडित रविकांत जी महाराज ने कलयुग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि त्रेता, सतयुग व द्वापर की अपेक्षाकृत कलयुग में ईश्वर की आराधना करना सबसे आसान है इस युग मे ईश्वर की प्राप्ति करना सबसे आसान है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने पूर्व में ही लिखा था कि” कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहि पारा” यानी कलयुग जो मनुष्य ईश्वर की आराधना सच्चे मन से करेगा वह निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त कर लेगा जबकि अन्य युगों में लोगों को घोर तप साधना करनी पड़ती थी वही उन्होंने आगे यह भी कहा कि यह श्रीराम की ही कृपा है कि करीब पांच सदियों की त्रासदी के बाद ही अयोध्या में भव्य, दिव्य व नव्य मन्दिर बनकर तैयार हो गया है हर हिन्दू को एक बार बालरूप श्रीराम के दर्शन जरूर करने चाहिए थे। वही परीक्षित के रूप में समाजसेवी सुखदेव चौबे सपत्नी विराजमान दिखे तथा झाड़ी महोत्सव समिति के समस्त पदाधिकारी भक्तगणों की सुविधा में समर्पित दिखे।

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Author: R Hindustan

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