बैतूल में सड़क निर्माण या ठेकेदार की जेब भराई?

बैतूल, मध्यप्रदेश (07 अप्रैल 2025): मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के नाम पर ठेकेदारों की मनमानी और भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। इस बार ग्राम बघवाड़ से मलकापुर पंचायत तक बनने वाले ग्रेवल मार्ग के निर्माण में भारी अनियमितताओं की शिकायत ग्रामीणों ने उठाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) विभाग के ठेकेदार ने घटिया काम करके सरकारी बजट का दुरुपयोग किया है। इस सड़क के लिए करीब 30 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में न तो तय मानकों का पालन किया गया है और न ही कोई ठोस कार्य हुआ है। सड़क के लिए अर्थवर्क (मिट्टी का काम) के नाम पर आसपास की मिट्टी को खोदकर डाला गया, जबकि मुरम भी बेहद कम मात्रा में बिछाई गई है। सड़क पर न तो रोलर चलाया गया और न ही पानी डालकर इसे मजबूत करने की कोशिश की गई। नतीजा यह है कि अभी से सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है और वाहनों का आवागमन तो दूर की बात है। ग्रामीणों का कहना है कि पहली बारिश में ही यह सड़क धंसने या बहने की कगार पर होगी, जिससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ेंगी।

ठेकेदार की लापरवाही और पारदर्शिता की कमी

इस निर्माण कार्य में पारदर्शिता का भी अभाव देखा गया है। सड़क के संबंध में न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही स्थानीय लोगों को यह बताया गया कि सड़क कितनी लंबी बननी है और इसके लिए कितना बजट तय किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार ने सिर्फ दिखावे के लिए थोड़ी-थोड़ी मुरम डालकर काम को पूरा करने की कोशिश की है, लेकिन यह सड़क लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है।एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा, “ठेकेदार ने बहुत ही घटिया काम किया है। न रोलर चला, न पानी डाला गया। ऐसे में सड़क का टिकना मुश्किल है। अगर सड़क पूर्ण होने तक सुधार नहीं हुआ तो हम आंदोलन करेंगे और सरकार को इसकी जानकारी देंगे।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा सरकारी तंत्र

बैतूल में सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बात अब आम हो चुकी है। आए दिन ठेकेदारों की मनमानी के मामले सामने आ रहे हैं, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार हर साल जनता की सुविधा के लिए लाखों रुपये का बजट आवंटित करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभागों के ठेकेदार अच्छा काम करने के बजाय अपनी जेब भरने में लगे हैं। इस ताजा मामले ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में विकास सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है?

ग्रामीणों की मांग: जांच और कार्रवाई

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस घटिया निर्माण की जाँच की जाए और दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जिला कलेक्टर इस मामले में संज्ञान लेंगे और आरईएस विभाग को ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देंगे, या फिर यह सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा।

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Author: R Hindustan

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