आर्द्रभूमि संरक्षण को लेकर शामली वन प्रभाग की अनूठी पहल


विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर मामौर झील में पक्षी जागरूकता एवं बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित

कैराना (शामली) अजीत कुमार श्रीवास्तव 

विश्व आर्द्रभूमि दिवस (थीम – “आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव”) के अवसर पर शामली वन प्रभाग द्वारा कल मामौर झील, कैराना में पक्षी जागरूकता, आर्द्रभूमि संरक्षण एवं बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन एवं विद्यार्थियों को आर्द्रभूमियों के संरक्षण, पक्षियों की सुरक्षा, जैव विविधता तथा प्राकृतिक जलस्रोतों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी, शामली श्री जगदेव सिंहक्षेत्रीय वन अधिकारी ऊनक्षेत्रीय वन अधिकारी कैराना सहित शामली वन प्रभाग के समस्त वनकर्मी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध पर्यावरणविद श्री मुस्तकीन मल्लाह, मामौर स्थित मदरसे के बच्चे, वीर अब्दुल अहमद पब्लिक स्कूल तथा जामिया एकेडमी, कैराना के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

इस अवसर पर आयोजित आर्द्रभूमि संरक्षण व्याख्यान में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि आर्द्रभूमियाँ प्राकृतिक जल भंडारण, भू-जल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण तथा पक्षियों व अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही आर्द्रभूमियों पर हो रहे अतिक्रमण, प्रदूषण एवं जलस्तर में कमी जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया तथा इनके संरक्षण हेतु सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बच्चों एवं नागरिकों को पक्षियों के जीवनचक्र, प्रवासी पक्षियों की भूमिका तथा पर्यावरण संतुलन में उनके महत्व के बारे में जानकारी दी गई। आमजन से अपील की गई कि वे जलस्रोतों में कचरा न डालें, प्लास्टिक का प्रयोग कम करें, अवैध गतिविधियों की सूचना वन विभाग को दें तथा ग्रीष्म ऋतु में पक्षियों के लिए जल एवं दाना उपलब्ध कराएं।

पर्यावरणविद श्री मुस्तकीन मल्लाह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार स्थानीय पारंपरिक ज्ञान और छोटे प्रयास आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण में प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। वहीं श्री अनीस मास्टर जी ने बच्चों को प्रकृति से जुड़ाव रखने और पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंतर्गत बर्ड वॉचिंग गतिविधि का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को मामौर झील क्षेत्र में पाए जाने वाले स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों से परिचित कराया गया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पक्षी संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ किया गया कि आर्द्रभूमि और पक्षियों का संरक्षण परस्पर जुड़ा हुआ है, और इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

AJEET SHRIWASTAVA
Author: AJEET SHRIWASTAVA

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