ईमानदार करदाता असुरक्षित क्यों? बजट 2026 से पहले उठे बड़े सवाल


“टैक्स भरोसे से आता है, डर से नहीं”: बजट 2026 से करदाताओं की बड़ी अपेक्षाएँ

नोटिस कल्चर, GST ITC, MSME पर सख़्ती और रिफंड देरी को लेकर कर विशेषज्ञों की सरकार से अपील

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

बजट 2026 से पहले देश के करदाताओं और कर विशेषज्ञों ने सरकार से कर व्यवस्था को डर आधारित ढांचे से निकालकर भरोसे, पारदर्शिता और न्याय पर आधारित बनाने की मांग की है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर सलाहकार CA (Dr.) Akash Gupta का कहना है कि आज का ईमानदार करदाता टैक्स देने से नहीं, बल्कि अनिश्चित और भयपूर्ण प्रक्रियाओं से परेशान है।

डॉ. गुप्ता के अनुसार, रिटर्न फाइल करने के बाद भी करदाता निश्चिंत नहीं रह पाता कि कब, किस आधार पर और किस वर्ष का नोटिस आ जाए। “कर प्रणाली ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति भी हमेशा संदेह के घेरे में रहे,” उन्होंने कहा।

नोटिस कल्चर बना बड़ी समस्या

कर विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में तकनीकी mismatches, मामूली डाटा अंतर या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर वर्षों पुराने मामलों में भी नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। इससे न केवल करदाता का समय और धन बर्बाद होता है, बल्कि विभाग और न्यायिक प्रणाली पर भी अनावश्यक दबाव बढ़ता है।

डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि बजट 2026 में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बिना ठोस साक्ष्य और वास्तविक कर-चोरी के मामलों में ही नोटिस और मांग जारी की जाए।

GST में ITC को लेकर असुरक्षा

GST के तहत Input Tax Credit (ITC) को लेकर ईमानदार व्यापारियों में गहरी चिंता है। वैध इनवॉइस, बैंक के माध्यम से भुगतान और वास्तविक सप्लाई के बावजूद यदि सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता, तो खरीदार की ITC रोक दी जाती है।

डॉ. गुप्ता का कहना है कि यह व्यवस्था न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक। “सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि bona fide assessee को सप्लायर की गलती की सज़ा न भुगतनी पड़े,” उन्होंने कहा।

MSME सेक्टर में भय का माहौल

छोटे व्यापारी और MSME सेक्टर के लिए कर कानून आज भी डर का कारण बने हुए हैं। साधारण procedural चूक, लेट फाइलिंग या व्याख्या संबंधी मतभेदों को भी कई बार आपराधिक दृष्टि से देखा जाता है।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि गिरफ्तारी, भारी जुर्माना और आपराधिक कार्यवाही जैसे प्रावधान केवल जानबूझकर की गई गंभीर कर-चोरी तक सीमित रहने चाहिए।

रिफंड और अपील प्रक्रिया पर सवाल

अपीलों का वर्षों तक लंबित रहना और वैध रिफंड का अटक जाना करदाताओं के cash flow को प्रभावित करता है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि करदाता से देरी पर ब्याज लिया जा सकता है, तो सरकार को भी रिफंड में देरी पर ब्याज देने के लिए बाध्य होना चाहिए।

Presumptive Taxation में सुधार की ज़रूरत

धारा 44AD और 44ADA जैसी Presumptive Taxation Schemes को डिजिटल लेन-देन, कम मार्जिन और नए बिज़नेस मॉडल के अनुरूप अधिक लचीला बनाने की मांग भी उठाई गई है, ताकि ईमानदार करदाता असुरक्षित महसूस न करे।

CA और कर सलाहकार कर-चोरी का माध्यम नहीं

डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर सलाहकार कर-चोरी को बढ़ावा देने वाले नहीं, बल्कि करदाताओं को कानून की जटिलताओं से निकालने वाले पेशेवर मार्गदर्शक हैं। प्रशासन और पेशेवर समुदाय के बीच विश्वास को कमजोर करना पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

अंत में उन्होंने कहा, “बजट 2026 से करदाता किसी विशेष छूट की नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद कर प्रणाली की अपेक्षा कर रहा है। टैक्स डर से नहीं, विश्वास से आता है।”

AJEET SHRIWASTAVA
Author: AJEET SHRIWASTAVA

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