धनुष यज्ञ और लक्ष्मण-परशुराम संवाद सुन भाव-विभोर हुए दर्शक

न्यूज डेस्क, R Hindustan, औरैया, Published by : रेनू गुप्ता

फफूंद/औरेया नगर में स्थित प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही 11 दिवसीय श्री रामलीला एवं दशहरा मेला महोत्सव में 153 वां गौरवशाली वर्ष चल रहा है। श्री रामलीला महोत्सव के पांचवे दिन गुरुवार की रात्रि को विशाल धनुष यज्ञ और लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीलाओं का मंचन किया गया।इस दौरान श्रीराम द्वारा भगवान शिव का धनुष तोड़ते ही श्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। वहीं लक्ष्मण और परशुराम के संवाद की लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।मंचन देखने के लिए रामलीला पंडाल में भक्तो की भारी भीड़ रही।
नगर में स्थित प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही 11 दिवसीय श्री रामलीला एवं दशहरा मेला महोत्सव के पांचवे दीन गुरुवार की रात्रि को विशाल धनुष यज्ञ और लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीलाओं का मंचन किया गया।रामलीला मंचन में दिखाया गया कि मिथिला के राजा जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर में लंकापति रावण समेत दूसरे राजा धनुष नहीं उठा सके तो सभा में सन्नाटा छा गया। राजा जनक ने कहा कि यह पृथ्वी वीरों से हीन हो गई है, राजा जनक की यह बात सुनकर लक्ष्मण क्रोध से आगबबूला होकर बोले जहां रघुवंश का एक भी व्यक्ति मौजूद हो वहां इस तरह की बातें नहीं की जातीं। यदि गुरु की आज्ञा पाऊं तो पूरे ब्राह्मांड को उठाकर कच्चे घड़े की तरह फोड़ डालूं तब लक्ष्मण को श्री राम शांत करते हैं। इसके बाद गुरु महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को राजा जनक का संताप दूर करने के लिए धनुष उठाने के लिए भेजा। भगवान राम के हाथ धनुष टूटा तो पंडाल में बैठे दर्शकों ने जय श्रीराम के जोरदार जयकारे लगाए।उधर, शिव धनुष टूटते ही शिव भक्त परशुराम का दरबार में प्रवेश होते है। जनक ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ को मिथिला आने के लिए निमंत्रण भेजाद्ध राजा दशरथ और उनके पुत्रों का मिथिला में स्वागत किया गया। लक्ष्मण परशुराम सम्बाद देखने के लिए पंडाल में सुबह तक डटे रहे श्रद्धालु। इस मौके पर रामलीला समिति के अध्यक्ष ने आए हुए सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर रामलीला समिति के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे।

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Author: R Hindustan

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