दोहरे चरित्र के लोगो से अच्छा है आप अकेले रहें

1● आप अन्दर से कुछ और व बाहर से कुछ ऐसे लोगों को ही दोहरा चरित्र वाला कहा जाता है
2● चरित्र मानव की स्थाई निधी है दया उदारता चिन्तन सद्व्यवहार शिष्टाचार ही मनुष्य के उत्तम चरित्र की पहचान है
3●ईमानदार उत्तम आचरण वाला आपने बचनो पर चलने वाला धार्मिक हो सकता है लेकिन हर धार्मिक व्यक्ती चरित्रवान नही हो सकता है क्योकि धर्म और चरित्र मे अन्तर है
4● किसी व्यक्ती के बिचार इक्षाओ आकांछाओ व आचरण जैसा भी होगा उसी के आधार पर चरित्र का निर्माण होता है
5● स्वयं सम्मान पाने से पहले दूसरे का सम्मान करै और दूसरो की इज्जत करें ईमानदार रहे व अपनो का कहना माने इससे चरित्र का निर्माण होने लगता है
6● व्यक्ती के चरित्र निर्माण मे कुछ बातो पर निर्भर करता है परिवार के संस्कार व्यक्ति का स्तर व बिचार स्वयं के अनुभओ मित्रो स्वयं की पसंद ना पसंद चरित्र को सुधार व बगाड सकती है परन्तु यह आसान नही है
7● इन्सान चाहे तो चरित्र को अच्छा बना सकता है कहावत हे कि धन खो जाय तो कुछ भी नही खोया यह वापस मिल जाता है किन्तु चरित्र ही चला जाय तो सब खो गया जो बापस नही मिलता है
8● चरित्र निर्माण के लिए रामचरित मानस से कोई अच्छी पुस्तक नही है
9● चरित्र निर्माण मे उम्र निकल जाती है ओर चरित्र गिरने पर इन्सान अर्श से फर्श पर आ जाता है
10● लोगो का काम है अच्छे लोगो की भी बुराई करना चरित्र निर्माण मे कुछ बाते जरूर ध्यान दे सकारात्मक दृष्टिकोण स्वयं दिल से बिचार ईमानदारी सहयोगी भावना हमारे दृष्टिकोण हमारे जीवन की नीव रखता है

गिरीश चंद्र पाण्डेय(बीज भण्डार सिकन्दरा कानपुर 9358552145)यदि आपको अच्छा लगे तो शेयर करे

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Author: R Hindustan

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