बिहार में मुखिया बनने के लिए आपराधिक केस जरूरी? सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली, 28 मार्च 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान बिहार की स्थानीय राजनीति पर तंज कसते हुए बड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि बिहार में मुखिया बनने के लिए यह जरूरी है कि उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो। कोर्ट ने हल्के अंदाज में यह भी जोड़ा, “अगर आपके खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं है, तो आप बिहार में मुखिया का चुनाव भी नहीं जीत सकते।”
यह टिप्पणी उस वक्त आई जब कोर्ट बिहार के एक गांव के मुखिया की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो बिहार में ग्रामीण नेतृत्व और आपराधिक मामलों के बीच कथित संबंधों की ओर इशारा करती है। हालांकि यह बयान मजाकिया लहजे में था, लेकिन इसने राज्य में स्थानीय शासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार में पंचायत चुनाव और मुखिया पद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं, जहां कई निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आती रही है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी छा गई है, जहां लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे हास्य के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे राज्य की राजनीतिक संस्कृति पर करारा कटाक्ष मान रहे हैं।
फिलहाल, इस मामले में कोर्ट का अंतिम फैसला और विस्तृत जानकारी का इंतजार है। लेकिन इस टिप्पणी ने एक बार फिर बिहार की पंचायती राज व्यवस्था और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के प्रभाव पर बहस छेड़ दी है।

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Author: R Hindustan

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