हरे-भरे पेड़ों पर काल बनकर टूट रहा शामली वन विभाग़
अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित प्रजातियों व आम के बागों का अवैध कटान, वन अधिनियमों की खुलेआम धज्जियां
शामली। अजीत कुमार श्रीवास्तव
जनपद शामली में वन विभाग की कथित मिलीभगत से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े केंद्रीय व राज्य कानूनों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों के साथ-साथ हरे-भरे आम के बागों का धड़ल्ले से कटान किया जा रहा है, जो भारतीय वन अधिनियम 1927, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
जहां एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें प्रदूषण नियंत्रण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए करोड़ों पौधरोपण का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर शामली में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कथित रूप से आर्थिक लाभ के लिए नियम-कायदों को ताक पर रखकर हरियाली पर कुल्हाड़ी चलवा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार गढ़ीपुख्ता क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हैं। आरोप है कि वन विभाग में तैनात एक पुलिसकर्मी लकड़ी माफियाओं को संरक्षण प्रदान कर रहा है। वह न केवल अवैध कटान के दौरान निगरानी करता है, बल्कि पूर्व सूचना देकर यह भी सुनिश्चित करता है कि कोई मीडिया कर्मी या अधिकारी मौके तक न पहुंच सके। यह कृत्य लोक सेवक द्वारा कर्तव्य की अवहेलना की श्रेणी में आता है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
इसी संरक्षण के चलते थानाभवन–ऊन मार्ग स्थित गढ़ी अब्दुल्ला, गांव बूंटा तथा राजबहा के किनारे स्थित आम के दो हरे-भरे बागों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। जानकारों के अनुसार फलदार वृक्षों का इस प्रकार कटान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि जनपद में अब तक सैकड़ों फलदार बाग अवैध रूप से समाप्त किए जा चुके हैं।
Author: AJEET SHRIWASTAVA
District Bureau Chief - Shamli Uttar Pradesh








