“सवर्णों को एक हफ्ते में आरक्षण, तो 17 पिछड़ी जातियों को SC का दर्जा क्यों नहीं?” : किरणपाल कश्यप का सरकार पर बड़ा हमला

 

पिछड़ों के आरक्षण पर डाका डाला गया, संख्या के आधार पर बढ़ाओ कोटा: किरणपाल कश्यप

 

शामली: अजीत कुमार श्रीवास्तव 

 

विधान परिषद सदस्य (MLC) किरणपाल कश्यप ने पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शामली में मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने सरकार पर पिछड़ों के हकों की अनदेखी करने और उनके आरक्षण में ‘डाका’ डालने का गंभीर आरोप लगाया।

 

आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा

किरणपाल कश्यप ने विभिन्न भर्तियों का हवाला देते हुए कहा कि पिछड़ों को उनके हक का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा:

 

नियुक्तियों में भेदभाव: जहां 27 प्रतिशत के अनुपात में 60 पद होने चाहिए थे, वहां पिछड़ों को मात्र 20 पद मिले।

 

पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती: 404 पदों पर हुई भर्ती में नियमानुसार 110 पद पिछड़ों के हिस्से आने चाहिए थे, लेकिन वहां ‘शून्य’ पद मिला। कश्यप ने सवाल उठाया कि इससे गंभीर मामला और क्या हो सकता है?

 

69 हजार शिक्षक भर्ती पर उठाए सवाल

 

MLC कश्यप ने 69 हजार शिक्षक भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में सरकार की मंशा पूरी तरह साफ हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा स्टे (रोक) लगाए जाने के बावजूद सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया, जो पिछड़ों के साथ सरासर अन्याय है।

 

17 जातियों को SC में शामिल करने की मांग

किरणपाल कश्यप ने मांग की कि कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, राजभर और प्रजापति समेत 17 अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल कर उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाए। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:

 

“जब सवर्णों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मात्र एक सप्ताह के भीतर 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो वर्षों से मांग कर रही इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा?”

 

जाट आरक्षण और हक की लड़ाई

उन्होंने यह भी कहा कि जाट समाज को पिछड़ों में शामिल करने से मूल पिछड़ी जातियों का नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि “हमारे हक को बांटकर दूसरे समाज को दे दिया गया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि ‘संख्या के आधार पर कोटा’ बढ़ाया जाए ताकि हर वर्ग को उसकी आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व मिल सके।

 

AJEET SHRIWASTAVA
Author: AJEET SHRIWASTAVA

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