⚡ स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर बवाल: रिचार्ज के बाद भी नहीं आ रही बिजली, उपभोक्ता बेहाल
शामली। प्रदेश में लागू की जा रही स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना अब लोगों के लिए नई मुसीबत बनती जा रही है। तकनीक के नाम पर शुरू की गई इस व्यवस्था से जहां राहत मिलने की उम्मीद थी, वहीं अब यह आम जनता के लिए सिरदर्द साबित हो रही है।
गांवों में रहने वाले अधिकांश उपभोक्ता इस सिस्टम को समझ ही नहीं पा रहे हैं। स्मार्ट मीटर चलाने के लिए मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लोग न तो स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल जानते हैं और न ही डिजिटल भुगतान की जानकारी रखते हैं। ऐसे में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा भी अब उनके लिए चुनौती बन गई है।
सबसे ज्यादा परेशानी तब सामने आ रही है, जब उपभोक्ता पहले से रिचार्ज कराने के बावजूद अचानक अंधेरे में डूब जाते हैं। यूनिट खत्म होते ही बिना किसी सूचना के बिजली कट जाती है। और जब उपभोक्ता तुरंत भुगतान कर देते हैं, तब भी बिजली बहाल होने में घंटों या कभी-कभी पूरा दिन लग जाता है।
पीड़ित उपभोक्ता जब शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें साफ जवाब मिलता है कि यह पूरा सिस्टम मुख्यालय से कंट्रोल होता है और स्थानीय स्तर पर कोई हस्तक्षेप संभव नहीं है। यानी समस्या चाहे जितनी गंभीर हो, समाधान के लिए उपभोक्ता को इंतजार ही करना पड़ता है।
जानकारों का कहना है कि सर्वर की धीमी गति और तकनीकी खामियों के कारण भुगतान की जानकारी समय पर अपडेट नहीं हो पा रही, जिससे बिजली बहाली में देरी हो रही है।
इधर, आम जनता के साथ-साथ कई राजनीतिक दलों ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों की मांग है कि जब तक सिस्टम पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही यह भी जरूरी है कि बिल जमा होने के बाद बिजली बहाल करने की एक तय समय-सीमा हो और देरी पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना उनके घरों में स्मार्ट मीटर क्यों लगाए जा रहे हैं?
🖊️ रिपोर्ट:
अजीत कुमार श्रीवास्तव
जिला प्रभारी, शामली
📞 9456889665
आर हिंदुस्तान न्यूज पोर्टल
Author: AJEET SHRIWASTAVA
District Bureau Chief - Shamli Uttar Pradesh




