आईआईटी रुड़की के तकनीकी सहयोग से लागू होगी योजना, पर्यावरण संरक्षण के साथ मिलेगा आर्थिक लाभ
भारत सरकार की प्राथमिकता वाले किसान समृद्धि कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उप कृषि निदेशक, शामली के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संयुक्त कृषि निदेशक (सहारनपुर मंडल) श्री यतेन्द्र सिंह ने की, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी एवं नामित कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में जनपद के कृषि एवं संबंधित विभागों के आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा की गई। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो. ए.एस. मौर्य (आईआईटी रुड़की) के मार्गदर्शन में योजना के तकनीकी पहलुओं और डेटा संग्रहण प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
संयुक्त कृषि निदेशक श्री यतेन्द्र सिंह ने कहा कि यह पहल सतत कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को उभरते कार्बन बाजार से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है।
क्या है कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम?
यह देश और उत्तर प्रदेश का पहला कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत:
किसानों द्वारा किए गए पर्यावरण संरक्षण कार्यों (जैसे पराली प्रबंधन, कम जुताई, वृक्षारोपण) को मापा जाएगा।
इसके बदले किसानों को कार्बन क्रेडिट दिए जाएंगे।
इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर आय अर्जित की जा सकेगी।
प्राप्त धनराशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी।
कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य:
कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना
वैज्ञानिक व नवीकरणीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना
मृदा स्वास्थ्य में सुधार और जैविक कार्बन बढ़ाना
किसानों की आय में वृद्धि और हरित रोजगार सृजन
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आईआईटी रुड़की के तकनीकी सहयोग से योजना को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा। फील्ड स्तर पर डेटा संग्रहण और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंचे।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक श्री प्रमोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी श्री प्रदीप कुमार यादव, तकनीकी कर्मचारी मोहित कुमार सहित अन्य अधिकारी व कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट:
अजीत कुमार श्रीवास्तव
जिला प्रभारी, आर हिंदुस्तान
📞 9456889665
Author: AJEET SHRIWASTAVA
District Bureau Chief - Shamli Uttar Pradesh






