डॉक्टर हत्याकांड की खबर प्रसारित करने पर वरिष्ठ पत्रकार को मौत की धमकी, गालियों से भरा ऑडियो वायरल
शामली। पत्रकारिता पर हमला अब किसी छिपे हुए खतरे की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम घोषित जंग बन चुका है। पश्चिम यूपी में सच्चाई दिखाना अब मौत को दावत देने जैसा हो गया है। बड़ौत में डॉक्टर मोहम्मद परवेज़ की हत्या की खबर प्रसारित करना भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एसोसिएशन (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार के लिए ऐसा अपराध साबित हुआ, जिसकी सज़ा उन्हें गालियों और मौत की धमकी के रूप में दी गई।
23 अगस्त की सुबह 8:59 बजे बड़ौत संवाददाता अली हसन मुल्तानी ने खबर भेजी कि MBBS, MD डॉक्टर मोहम्मद परवेज़ की अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पत्रकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और खबर तुरंत प्रकाशित कर दी।
लेकिन खबर प्रसारित होते ही अपराधियों का पिट्ठू बन चुका सलीम नाम का युवक सामने आया। पहले उसने फोन कर खबर को झूठा बताया और दबाव बनाकर खबर बदलवाई। पत्रकार ने ईमानदारी से खबर में सुधार भी कर दिया। लेकिन अपराधियों का यह गुंडा यहीं नहीं रुका। दोपहर 12:53 बजे दोबारा कॉल करके उसने न सिर्फ गालियां दीं बल्कि खुलेआम धमकी दी –
“डॉक्टर के दफन होने के बाद संपादक जमीर आलम को भी देख लूंगा।”
यह बयान साबित करता है कि सलीम सीधे-सीधे हत्यारों का साथी और उनका मुखबिर है। संवाददाता द्वारा भेजी गई ऑडियो क्लिप में सलीम की जहर उगलती गालियां और धमकियां सुनकर हर किसी का खून खौल उठेगा।
पत्रकार का कहना है –
“पूरे प्रदेश और देशभर से किसी ने इस खबर पर आपत्ति नहीं जताई, सिर्फ सलीम ने ही विरोध किया। इसका साफ मतलब है कि वह अपराधियों का चेला है और उन्हीं के इशारे पर पत्रकारिता की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रहा है।”
पत्रकारिता को कुचलने की साजिश
यह घटना किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा नहीं, बल्कि पत्रकारिता को खत्म करने की गहरी साजिश है। सवाल साफ है – जब सलीम जैसे गुंडे अपराधियों का चेहरा बनकर पत्रकारों को धमकियां देंगे तो कौन सच दिखाने की हिम्मत करेगा?
पत्रकार ने समाज और लोकलिहाज के डर से पहले चुप्पी साधी, लेकिन पूरी रात बेचैनी और खौफ में गुजारने के बाद आखिरकार शामली कोतवाली में तहरीर दी। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर सलीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
पत्रकार संगठनों का गुस्सा
पत्रकार संगठनों ने कहा कि –“यह हमला केवल एक पत्रकार पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर है। सच को कुचलने की कोशिश करने वालों को हर हाल में जेल की सलाखों के पीछे भेजना होगा। अगर सरकार और प्रशासन चुप बैठा रहा तो कल हर पत्रकार अपराधियों का निशाना बनेगा।”
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन सलीम जैसे अपराधियों के दलाल पर शिकंजा कसकर उसकी असलियत सामने लाता है या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा।
Author: AJEET SHRIWASTAVA
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