श्री मद् शिव महापुराण कथा के समापन पर श्रोताओं में चखा प्रसाद

रेनू गुप्ता/औरैया:- कस्बे के मुहल्ला तिवारियान स्थित यक्षेश्वर शिव धाम पर श्री मद् शिव महापुराण कथा एव षष्टम विशाल शिव शक्ति महायज्ञ का समापन बड़ी धूमधाम से किया गया। चित्रकूट धाम से पधारे आचार्य को दीक्षा के लिए चार वालक सौपे गये।रविवार को विशाल भण्डारे का आयोजन किंया गया जिसमें नगर की माताओ,बहिनो,युवाओं ने भण्डारा तैयार करवाने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया।

नगर के यश्चेश्वर धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्री मद् शिव महापुराण की कथा के शनिवार को समापन के बाद आरती की गई और श्रोताओं को प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम जिसमें कुछ माताओ ने अपने बालको को संस्कृत पाठशाला में पढ़ने के लिए दण्डी स्वामी महेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज को सौप दिया।भण्डारे में भारी संख्या में साधु सन्तो महान्तो ने कथा पण्डाल में पहुचकर प्रसाद ग्रहण किया। नगर की कऱ्याओ को आमत्रित कर भण्डारे का प्रसाद वितरित किया। इसके उपरात्त अयोजको सहित श्रोताओं ने आचार्य का फूल मालाओ से लाद कर आर्शीवाद प्राप्त किया ।उन्होने कहाकि आप लोगो ने हमें जो प्यार व स्नेह दिया है उसे कभी भूलाया नही जा सकेगा।कथा. पण्डाल में यज्ञ शाला पर हवन पूजन का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में पूर्ण आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण किया।दण्डी स्वामी महेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने भण्डारे के वारे में बताया कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। दोपहर से भंडारा शुरु किया गया। जिसमें आये हुए महान्तों सन्तो साधूओं को बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराया गया। आस पास के लोगों का हुजूम प्रसाद ग्रहण करने के लिए उमड़ता रहा।कथा पण्डाल में महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई और उन्हे बैठाकर प्रेम पूर्वक प्रसाद ग्रहण कराया गया। प्रसाद वितरण की व्यवस्था युवा वर्ग के कधो पर दी और चाक चौवन्द व्यवस्था बनाये हुए थे। आने वाले हर भक्त को कतारों में वैठाकर प्रसाद वितरण कर रहे थे।प्रसाद ग्रहण करने के वाद लोगों प्रसाद व्यवस्था को लेकर युवाओ की काफी सराहना की।

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Author: R Hindustan

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